वज़ूद
- Dec 4, 2023
- 1 min read

मेरा न था कभी
कोई वज़ूद अपना
तेरे ही नाम से
पहचान अब मेरी है,
मेरे होठों की मुस्कान
भी मेरी ख़ुद की नहीं
ये मुस्कान भी बस
याद में अब तेरी है ,
तू साथ है तो
साथ है रोशनी
भले ही हर राह
मेरी अंधेरी है ,
तेरा हाथ पकड़
संभल जाती हूँ मैं
चाहे पग पग पर
ठोकरें घनेरी हैं,
मेरा रोम रोम
रचा है तुझसे
मेरी हर साँस
कर्ज़दार बस
तेरी है
दिल भले ही धड़कता
मेरे सीने में सनम
इसकी हर धड़कन में
जान भी जान
तेरी है
.png)



Comments