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कुछ तो रहा है बदल

  • Dec 4, 2023
  • 1 min read

Updated: Dec 15, 2023


CHANGE IS THE ONLY CONSTANT
कुछ तो रहा है बदल

कुछ तो रहा है बदल

कुछ बदल रहा है...

हाँ ! कुछ तो रहा है बदल

ये मौसम,

ये हवाएं,

ये बादल,

ये फ़िज़ाएं ?

नहीं…….

साँसें रही हैं बदल

बातें हो रही गज़ल,

फिर जी उठा है मन

खुल रहे बंद नयन,

काँटो में उलझने से अब

मुझको नहीं होती चुभन,

ख़ुशबू न हो तो भी

महकने लगे हैं सुमन,

अर्से बाद बदला सूरज

बदल रही है फिर किरण,

चहक उठे पंछी सब

झूम रहा है ये गगन

चलते चलते चाँद भी

ठहर सा गया है वहीं,

दिन में टिमटिमा रहे तारे

रूप बदल कर यहीं कहीं

धरा ने रूप बदल माँ का

बिछा दिया अपना आँचल

शायद !

कुछ तो बदल गयी हूँ मैं

हाँ ! कुछ रही हूँ बदल ।

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